चलो आज एक कहानी कहता हूँ
जो गुजर रही उसे जवानी कहता हूँ।
एक तरह से ही ये दिल धड़कता है अब
इसे एक चीज पुरानी कहता हूँ।
अब तक सफर में साथ है उनका
उन्हें मैं इक दीवानी कहता हूँ।
कुछ है नहीं पास बेदाग दामन के सिवा
उसे मैं दौलत खानदानी कहता हूँ।
कोई रूमाल न दे मेरी भरी आँखों को
अश्कों को उनकी निशानी कहता हूँ।
वो सम्हल जाता है किसी भी हालात में
उसे मैं चीज सयानी कहता हूँ।