बुरी यादों का असर नहीं रखता हूँ अपने ज़ेहन में ज़हर नहीं रखता हूँ। मंज़िल मिल जाए ये जुस्तजू पूरी है नहीं मिलने का डर नहीं रखता हूँ। बंदूक, तलवार,भाले सब हैं हाथों में अपने दामन में खंजर नहीं रखता हूँ। मेरी रग रग में घर कर गया है मगर अपने दिल में शहर नहीं रखता हूँ। तस्वीर दिखायी रकीब ने उसकी तेरी फ़िर भी तुझपे नज़र नहीं रखता हूँ। ख़ूब समझता हूँ मतलब आज़ादी का अपने आँगन में शजर नहीं रखता हूँ। दुनिया की पल पल की मिल जाती है बस अपनी ही ख़बर नहीं रखता हूँ।