बाहर का मौसम बहुत गरम है अन्दर का भी कहाँ नरम है। मरा हुआ है हर कोई जिंदा होने का भरम है। तेरा नीचा मेरा ऊँचा इंसानों का यही धरम है। आँखों तक अब नहीं पहुँचती चेहरे पर भी कहाँ शरम है। बुद्धि की हालत ना पूछो तंग विचारों का हरम है। वैसे तो नंगे हैं सारे कपड़े लत्ततों का वहम है। चक्कर हैं लेने देने का रिश्ते नातों का हवन है।