आख़िर कब तक मुझसे वो खफ़ा रहेगा
दरख़्त ये गर जिंदा है तो हरा रहेगा।
गर मुमकिन है तो दिल को सादा रखो
इश्क सुबह की ओस सा ताज़ा रहेगा।
अँधेरा शाम का गहना ,दिन का बोझ है
सूरज छिप जाएगा मगर ताकता रहेगा।
बारिश जुरुरी नहीं आसमाँ का दुख हो
आँखें नम हों मगर चेहरा हँसता रहेगा।
जमाने भर से हँस के बातें जो करता
सामने आईने के खुद से लड़ता रहेगा।