आदतन खुद से वादा हम तोड़ेंगे
वो जो आएँगी ,दरवाज़ा हम खोलेंगे।
तुम लगाते जाओ मेरे दामन पे दाग
टपकेंगे फ़िर लहू ,दाग़ हम धो लेंगे।
रात आएगी फ़िर झूटा ख़्वाब ले कर
करवटें बदल बदल झूटा सो लेंगे।
तुम फ़िर खेलो वो खेल मेरे होने का
हम भी गुड्डे की तरह तुम्हारे हो लेंगे।
जिंदगी समझने का दावा है हमारा
मौत आएगी जो मुँह तो नहीं मोड़ेंगे।