उस सूर्य से गिला मुझे
जो शाम से था डर गया
जो बादलों की ओट में
सिहर सिहर सिहर गया.
जो रात के ख़ुमार में
बिखर बिखर बिखर गया,
जो आँधिया ज़रा उठी
गुजर गुजर गुजर गया..
उस सूर्य से गिला नहीं
जो डूब कर भी उग गया ...
जो सागरों से सीने पे
चमक चमक चमक गया..
जो ज़िंदगी के जाम सा
छलक छलक छलक गया...
वो सूर्य ले के आओ ना
वो सूर्य तुम उगाओ ना
जो सूर्य कभी ना ढले
जो कर्मपथ के राह पर
रात दिन चला चला चले
रात दिन चला चला चले
