सपनों को जमीं पर चलने की
इजाज़त, किसने दी यारों...
हवाओं के इशारों की
ज़मानत किसने दी यारों..
किसने आसमा को
भर के रंगो से सजाया है ...
सितारों के मचलने की
हिमायत किसने की यारों...
बिखेरी रोशनी किसने
यहाँ इतने क़रीने से ...
अन्धेरे को भगाने की
हिमाक़त किसने की यारों...
पलकों को खुला रख कर
ये सोया कौन है बोलो...
के ज़िंदा साँस रखने की
नज़ाकत किसने की यारों..
