बूँदों ने बारिश से सौदा किया है
मौसम ने ऐसा एक मौक़ा दिया है
सौंधी सी मिट्टी भी कुछ कह रही है
ये हवा दीवानी हुई बह रही है
कोई यहाँ ,भीगना चाहता है
सपनों को मन सींचना चाहता है
ये कैसा है मंज़र ये कैसा नज़ारा
कितना हँसी है ये भीगा इशारा
बादल के काँधे पे मौजें धरी हैं
मौसम ने मेरी भी जेबें भरी हैं
हम घूमतें हैं, हम झूमते हैं
कुदरत की कैसी ये जादू गरी है…
