काश! ये दिल की बात दिल में ही रही होती।होठों से बयां ना हो कर, आँखों तक ही रही होती।ना होती एक मोहोब्बत मुकम्मल ना सही, यूँ भी तो ख़ाक हुई,वो दोस्ती जो दरमियाँ थी, वो अजनबी तो ना हुई होती।
काश! ये दिल की बात दिल में ही रही होती।होठों से बयां ना हो कर, आँखों तक ही रही होती।
ना होती एक मोहोब्बत मुकम्मल ना सही, यूँ भी तो ख़ाक हुई,वो दोस्ती जो दरमियाँ थी, वो अजनबी तो ना हुई होती।