वो जो रात थी वो खामोश थी,ये सवेरा है इसे बोलना आता है।ये लफ्ज़ कबाड़ है और है खज़ाना भी,देख लो जिसे जैसे तोलना आता है।
वो जो रात थी वो खामोश थी,ये सवेरा है इसे बोलना आता है।
ये लफ्ज़ कबाड़ है और है खज़ाना भी,देख लो जिसे जैसे तोलना आता है।