एक दिन, और मै ठीक हूं !                                    


एक दिन का है अमन,

एक दिन फिर जंग है !

एक दिन मै हूं सफेद,

एक दिन फिर नया रंग है !!


एक दिन रिआयत है,

एक दिन हुकूमत है,

एक दिन की है इनायत,

एक दिन फिर शिकायत है !!


एक दिन का है मामला,

एक दिन की है सुनवाई,

एक दिन हुए कुछ साल,

एक दिन फिर खडे सवाल !!


एक दिन पिघला कुछ मोम,

एक दिन मनाया मौन,

एक दिन कहा मैने "बदला"

एक दिन कहा "कुछ ना बदला" !!


एक दिन कोसी तरतीब,

एक दिन मिली तरकीब !

एक दिन कहा "अगर मै होता..."

एक दिन कहा "मै तो नही..." !!


एक दिन कलम दिया है,

एक दिन फिर छिन भी लोगे !

एक दिन जो लुटाओगे तारे,

एक दिन वो गिन भी लोगे !!


एक दिन धुआँ सा उठा था,

रातभर किसीके सपने जले !

रिझाते रिझाते एक अलाव को, हमसे,

न जाने कितने जंगल जले !!


एक दिन रोशनी बिकी थी,

एक दिन वो चांद बिकेगा !

निलाम है राते किसीकी, 

मगर एलान है, नया सवेरा दिखेगा !!

 

एक दिन की ये बेताबी,

एक दिन मै वही चुनू !

उंगलीयों की तलवार कर के,

फिर एक दिन मै ठीक हूं !!


एक दिन कुर्बत का,

एक दिन फ़ुरक़त का,

एक दिन सोह्बत का,

एक दिन फिर सरहद का !!


एक दिन की बराबरी,

एक दिन सब साफ है !

एक दिन फिर मै पुरुष,

एक दिन सब माफ है !!


एक दिन नारे लगाये,

एक दिन चूप कब्र सा !

एक दिन का ये सुकून,

एक दिन फिर बेसब्र सा !! 


एक दिन का था वो बचपन,

फिर, एक दिन अखबार पढा !

एक दिन इनकार मै जिया,

फिर, एक दिन हुआ बडा !!


एक दिन, किसीने जब कल की सोची,

किसीको याद आया कल,

किसीका फिर टूटकर झोंपडा,

किसीका फिर बंधा महल !!


एक दिन फिर दिखे दाग,

एक दिन फिर लगी आग,

एक दिन उजडे सुहाग,

एक फिर बजा बिहाग !

एक दिन खोली किताब,

एक दिन उतरे नकाब,

एक दिन जब खुला हिजाब,

एक दिन तब दिखा ये ख्वाब !!


एक दिन की है रुकावट,

एक दिन की है रवानी !

एक दिन मै हूं यहाँ,

एक दिन, मै हूं कहानी !!


- © निहार शंतनू भावे