चिताओ पे रोटियाँ सेकते हो
इतनी रोटी खा लेते हो
कितनी रोटी नर्म लगती होगी
रोटियाँ कितनी स्वादिष्ट होगी
क्या तुम ये रोटी बाँटते हो
कितनी रोटी सेकते हो
भूखा जो जला होगा
उसके घर वालों ने
नंगे नन्हे किलकारो ने
क्या ये रोटी देखी होगी
क्या रात भूख से कटती होगी
सोचा कभी होगा ऐसा
इंसान के रूप में हैवान हो जैसा
सांस तो ली होगी
फूंक फूंक के खाई जो रोटी
गरम गरम ये रोटी तेरी
बस तूने ही खाई होगी
कब तक सेकोगे ऐसी रोटी
सिकती कैसे तुमसे ये रोटी !!
चिताओ पे कैसे सेकोगे रोटी
जब घर की होगी ऐसी रोटी ??
छोटी रोटी मोती रोटी
गोल मोल ज़िंदगी की रोटी !


