ये सोच गुज़र रही है मेरी सुबह-शाम ज़िन्दगी,तेरे पहलुओं में करूँ बसर मैं तमाम ज़िन्दगी !अब हुनर की कश्तियाँ बनाकर डूबा दी है मैंने,ये महकमा देता है सिफारिशों पर काम ज़िन्दगी !नेश 'शायर'
ये सोच गुज़र रही है मेरी सुबह-शाम ज़िन्दगी,तेरे पहलुओं में करूँ बसर मैं तमाम ज़िन्दगी !अब हुनर की कश्तियाँ बनाकर डूबा दी है मैंने,ये महकमा देता है सिफारिशों पर काम ज़िन्दगी !
नेश 'शायर'