Poetry 1 min read 781.9K reads

ज़िन्दगी


ये सोच गुज़र रही है मेरी सुबह-शाम ज़िन्दगी,तेरे पहलुओं में करूँ बसर मैं तमाम ज़िन्दगी !अब हुनर की कश्तियाँ बनाकर डूबा दी है मैंने,ये महकमा देता है सिफारिशों पर काम ज़िन्दगी !

नेश 'शायर'

Read more Earn more Learn more