तेरा यूँ मेरे सामने खामोश रहना बेइंसाफी है,
बस इक मर्तबा इशारा करदो इतना काफी है !
सुन तेरे लफ्ज़ों में गम है परवीन शाकिर सा,
मुझमें इश्क़ की गज़लों का तहज़ीब हाफी है !!
नेश 'शायर'


तेरा यूँ मेरे सामने खामोश रहना बेइंसाफी है,
बस इक मर्तबा इशारा करदो इतना काफी है !
सुन तेरे लफ्ज़ों में गम है परवीन शाकिर सा,
मुझमें इश्क़ की गज़लों का तहज़ीब हाफी है !!
नेश 'शायर'