ये वक्त भी गुजर जायेगा,
देश का हर योद्धा घर लौट आयेगा,
हर गली, चौराहा फिर शोर मचाएगा।
शादियों की नगाड़े पर ताल लगेगी नृत्य की,
वो दिन दूर नहीं जब हालात बदलेंगी विश्व की ।
थोड़े धैर्य की ही तो बात है,
ऐसी हज़ारों महामारी की काट है ।
परिस्थिति परीक्षाएं लेतीं हैं,
चित्कार की पराकाष्ठा नापती महामारी भी हारेगी,
थोड़े सब्र की ही तो बात है ।
-Prerna


