ये भूलों का शहर हैं यहाँ हर बात भुलाई जाती हैं। गौरी लंकेश हो या मासूम बच्चा यहाँ हर खून धोया जाता हैं। देख कर सुन कर हर बात हवा में उड़ाई जाती हैं लड़ने के डर से सही बात पर होंठो पे चुप्पी साधी जाती हैं। ये भूलों का शहर हैं यहाँ हर बात भुलाई जाती हैं। हो कोई भी 'निर्भया' यहाँ बस मोमबत्ती भुझने तक याद रखी जाती हैं ये भूलों का शहर हैं यहाँ हर बात भुलाई जाती हैं। गांधी,भगत सिंह, राजगुरु.... हो कोई भी यहाँ चौराहे की प्रतिमा में बस जयंती पर नमन कर हार चढ़ाया जाता हैं। ये भूलों का शहर हैं यहाँ हर बात भुलाई जाती हैं। -नेहा दुबे।