एक प्यारी नन्ही सी तितली जब आकर बैठी पीले फूल पर देख उसे मन हो आया मुझकों भी उड़ने का कितने प्यारे रंग भरे, सपनों को अपने पंखों मे ले वो उड़ती हैं मंडराती हैं यहाँ वहाँ हर फूल पर कितना कुछ कह गई मुझकों एक उम्मीद दे गई रंगहीन बिखरी सी होती दुनिया में रंगों को चुन भरने का कह गई पंख ना सही मन की उड़ान भरने का जज्बा दे गई चुन कर कुछ फूलों से रस भर कर कुछ रंगों को वो आज़ाद पंख फैलाए फिर उड़ गई। -नेहा दुबे।