तुम से दूर हो, खुद के करीब आ गई उम्मीद की तलाश जो अब तक दुनिया मे थी, अब वो मेरे भीतर आ गई। मृग मरीचि सा मन भटक रहा था, आज तलाश पूरी हैं, खुद को पा कर ।