झुंझला कर किसी बात से
यु चैन खोया नही करते
ये ज़िन्दगी के मुसाफ़िर, हाथ हे
तेरे अपनी लकीरे खीचने का सामर्थ्य।
किस बात से है तू खफा
किस बात से है दुखी
ये जान ले उस खुदा के बन्दे है
साथ तेरे आज भी खुदा।
नाउम्मीदी की चादर ना ओढ तू
जलते है चिराग़ उम्मीद के आज भी तेरे भीतर,
उस लौ को तू एक हवा का रुख तो दे।
बेवसी की बात ना कर,
है तू आज भी अपने ही बस में
बस तोड़ कर देख जरा
अपने मन के भ्रम को।
ना सोच तू की है कहाँ खड़ा,
ये सोच जरा आज भी है
सब पास तेरे बस हटा कर देख सब मन की आँखों से।