नन्ही- नन्ही चिड़ियाओं ने ची- ची के संगीत में लो फिर से एक नई भोर का स्वागत कर दिया । तारे भी रवि के आने का संदेशा देकर अलविदा कर धीरे- धीरे जाने को हैं । लिए अँधेरा जो रात थी, अब कुछ हल्की- हल्की होने को है । हर रोज़ एक नया संदेसा फिर से उम्मीद के सूरज को लेकर किरणे देखो अम्बर मे अपना अधिकार जमाती है । मध्यम-मध्यम भींनी सी खुशबू ले हवा जोश में बहती हैं । ग़ुम होता तम बड़ते रवि के आकार से । लाल- लाल सी बिंदिया जैसा किसी नारी का श्रृंगार हो मानों फिर से आ गया एक नया दिन लेकर आशाओं का रवि ।