उड. चला है फिर आज मन
चलो फिर एक दुनियाँ सजाते है।
जोड़ते है मन की बात से
दिलों को चलो आज फिर बैठ कुछ रिश्ते बनाते है।
चल पड़ते है आज वहीं पुरानी राहो में,
कहते है कुछ किस्से वक्त के
चलो आज फिर उस वक्त में चलते है।
कुरेदते है आज फिर उन सब को
जो यू ही गुमसुम बैठे है
चलो आज उन से ही कुछ गुफ्तगू करते है।
बुनते है कुछ सपने,
सँजोते है कुछ ख्वाब चलो आज फिर एक उड़ान भरते है।