सारे राज़ खोलती है,, आँखे आईना होती है मन का आँखे बोलती है दिल की ज़ुबानी, कह देती है अनकहीं कई कहानी,, इंसान कितना भी छुपा ले जज्बातो को मन कितना भी बहला ले दिमाग़ को,, चेहरा झूट बोल सकता है मुश्कान झूठी हो सकती है आँखे सब बोलती है,, सारे राज़ खोलती है,,   कभी आँसुओ में जज्बातो को बहा कर कभी इंतेज़ार में पलको को बिछा कर,, कितने सदियों का बोझ झेलती है,, आँखे सब बोलती है,, सारे राज़ खोलती है,,   कभी आँखे ,आँखों ही आँखों में बाते करती है, कई जन्मो की मुलाकाते करती है,, कभी ढूंढती है अंजना कुछ कभी मांगती है बेगाना कुछ कभी नफ़रत की भाषा, कभी प्यार की परिभाषा, पलके झुकाये तो हया,, उठाये तो सज़ा,, मुस्कुरा के देखे तो प्यार, शर्मा के देखे तो इजहार, औऱ नजरें उठा ले तो इंकार सपनो के कई दरवाज़े खोलती है,, आँखे चुप रहकर भी बहुत कुछ बोलती है,, आँखे सब बोलती है,, सारे राज़ खोलती है,,   रोती हुई आँखे मासूमियत दिखाती है, हँसती हुई आँखे प्यार जगाती है, ममता भरी आँखे प्यार लुटाती है,, दुखी आँखे दया का भाव जगाती है, आदर भरी आँखे सम्मान लाती है, विश्वास भरी आँखे आत्मसम्मान जगाती है,, बुजर्गों की आँखे जीवन का सार दिखाती है, बच्चो की आँखे नए जीवन का दीप जलाती है, आँखों की भाषा कई है इद्रीश ,, ये ख़ामोशी से कई जुबा कह जाती है,, आँखे सब बोलती है,, सारे राज़ खोलती है,,।।