चल उठ अभी तू ठान ले
हैं वक़्त तेरे पास भी
रेत सी फिसल रही
जो जिंदगी की सांस भी
लक्ष्य तू भी ठान ले
जो फैसला तूने किया
छोड़ ना कोई कसर
कर मेहनत जी जान से
प्रातः हो या रात हो
जो काटो की सेज भी
सिथील कभी बनो नहीं
तुम धूप सी चमक चलो


चल उठ अभी तू ठान ले
हैं वक़्त तेरे पास भी
रेत सी फिसल रही
जो जिंदगी की सांस भी
लक्ष्य तू भी ठान ले
जो फैसला तूने किया
छोड़ ना कोई कसर
कर मेहनत जी जान से
प्रातः हो या रात हो
जो काटो की सेज भी
सिथील कभी बनो नहीं
तुम धूप सी चमक चलो