मेरे भी हिस्से का कोई आसमां तो होगा

जहाँ एक छोटा सा बादल का टुकड़ा

टहलता होगा सिर्फ मेरे लिए

और होगी गुंजाईश बेरोकटोक मुझे भी

एक सिरे से दूसरे तक जाने की....

मेरे भी हिस्से का कोई आसमां तो होगा

जहाँ अपनी मर्जी से नीला, हरा, गुलाबी

रंग भर सकूंगी मैं जब जैसे चाहूँ

और नहीं होगी हदबंदी उसमें मेरे ख्यालों

पर, चुप कर कोने में बैठ जाने की

-नेहा़