क्या आपने तिरस्कार का स्वाद चखा है
मैने इसे चखा है।
उनके होंठ बंद हैं मगर उन बंद होंठों पर
गालियों का ढेर रखा है
उन घूरती निगाहों से अपमान टपकता है
इतना अपमान दिया
सिर्फ मेरे लिए, केवल मेरे लिए अपमान
तिरस्कार से भर दिया
पलकों का मुझसे यूँ फिर जाना
बताता है कि फिर यहां नहीं आना
तेरी यहां किसी को ज़रूरत नहीं
तू भाग जा यहां से कहीं
फिर अपना मुँह न दिखाना
फिर कभी यहाँ मत आना
समझ ले यह महफिल तेरी नहीं
जा दूर छिप जा कोनों में कहीं
जब निगाहों ने इतने शब्द कह दिए
यूँ सोच मैंने अपने कदम फेर लिए
कि क्यों न कहीं दूर जाऊं जहां ये निगाहें
फिर कभी मुझे मेरी औकात न बताऐं।