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तीन ताल


मेरे रोम-रोम में सजते हैं तीन ताल ये जो बजते हैं। मेरे चिर यौवन का आधार हर मात्रा है सोलह शृंगार हर एक थाप जीवन है आप मैं पलक मूँद देखूँ स्वरूप अपने चितवन का लय मय भए जीवन का।

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