
श्मशान
मैं खड़ी थी वहाँ जहाँ श्मशान था
कुछ नहीं था बस वहाँ राख का मैदान था
कुछ चिताएं जल रही थीं
और कुछ अब ख़ाक थीं
वृक्ष पूरा जल चुका था
बस बची अब राख थी
धरती का सीना फट चुका था
पाया जो ऐसा दान था
कुछ नहीं था बस वहाँ राख का मैदान था
चार कांधों के सहारे
आ रहे थे वो दीवाने
छोड़ चले थे संसार जो
तैयार थे परलोक जाने
चार कांधों के सहारे चल दिया मेहमान था
कुछ नहीं था बस वहाँ राख का मैदान था
क्या ये पाई मौत है कि
चंदन हो या लकड़ियां
कुछ भ
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