जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब विजयी हुए हो तो हारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब कोख़ के बाहर आए
मात-पिता के थे साये
तुम्हें तब भी सहारा चाहिए था
मॅंझधार में थे तुम, तुम्हें किनारा चाहिए था
जब बंद नन्ही पलकें भी नहीं खुली थीं
तब से यह नन्हीं काया गोद में पली थी
कभी न चुके, ऎसे मातृ-पितृ ऋण-उपकारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब कदमों ने आहट करना सीखा
जीवन के समतल पर बहे धारा सरीखा
एक अँगुली की फिर भी तुम्हें ज़रूरत थी
जब ठोकर लगी तो समझो हिदायत थी
जब तोतली वाणी में स्वर फूटते थे
तब मुख से केवल प्रश्न ही प्रश्न छूटते थे
तब तुम्हें एक पथ प्रदर्शक के इशारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब किशोर कह तुम्हें पुकारा जाता था
छोटी-छोटी बातों पर हृदय में घन घुमड़ आता था
आकाँक्षाओ के सागर में ले रहे थे हिलोरें
अरमान थे बहुत, जो सच हुए थोड़े
उन असफलताओं पर आँसू बहाने के लिए
तब सर रख कर धीरज धराने के लिए
एक कॅंधे के लिए, अपने यारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब आसमाँ के चंद्र हो तुम
सफलताओं में हो जाओ गुम
रोशन करो भले ही जग सारा
फिर भी अपने सौंदर्य हेतु चाहिए सहारा
आसमाँ की ऊंचाईयाँ भले छू लो
लोग भले ही कहें कि फलो फूलो
पर उनकी दुआ के लिए सितारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब उम्र तुम्हारी ढल रही हो
यौवन की शमा पिघल रही हो
आधा पड़ा हो जब जीवन
सूना पड़ा हो आँगन
जब कोई साथी चाहिए, हाँ वह सहारा
कि उम्र जिसके साथ जाए गुज़ारा
तब वो एक जिस पर प्राण हारो का सहारा लेना पडेग़ा
जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब नन्हें कदमों की रूनझुन
औरों की तोतली वाणी सुन-सुन
अपने के लिए कान अधीर हो उठे
जब हाथ मुड़कर गोद बन रो उठें
एक तब नन्हीं काया चाहिए
बस ज़रा सी मोह माया चाहिए
तब आँखों को भानेवाले दुलारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब देह थकने लगे
भारी बोझ जीवन लगने लगे
उतरने को भवसागर के पार
तड़पकर आत्मा करे पुकार
आत्मा परमात्मा में लीन होना चाहे
जीर्ण-शीर्ण शरीर यह माटी में खोना चाहे
तब तुम्हें सृष्टि के पालनहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब प्राण-पखेरू उड़ चुके हों
शिखरों को समाहित करते बादल झुके हो
जब आकाश का विस्तार मिल गया हो सारा
तब भी चाहिए होगा तुम्हें सहारा
जब जीवन की अंतिम यात्रा शव यात्रा बाकी हो
शमशान घाट तक की नव यात्रा बाकी हो
तब चार काँधों के लिए रिश्तेदारों का सहारा लेना पडेगा
जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा
जब विजयी हुए हो तो हारे का सहारा लेना पड़ेगा
जब माटी की देह धारण की है सहारों का सहारा लेना पड़ेगा