मेरी कब्र पर आया था कोई मेरे मरने के बाद फूल बरसाए थे किसी ने पतझड़ गुज़रने के बाद जब इन राहों की थकावट से चूर थे मंजिल से हम कोसों दूर थे तब क्या बयान करें अपनी निराशा लगा जैसे रह गई अधूरी अभिलाषा मंजिल आई भी तो रास्ता बदलने के बाद हाथ आई भी तो क्या इतना थकने के बाद   नटखट हम कभी नहीं रहे क्यों था ऐसा हम भी क्या कहें अठखेलियों का अनुभव न था नव हो कर भी पल्लव नव न था शरारत आई आँगन में मेरे,बचपना गुज़रने के बाद लड़कपन को क्या आसरा मिला मेरे घर करने के बाद   कदम डगमगाहट से हिले जाते थे रेंगते कीडों से मेरे हाल मिले जाते थे फिर खुद ही हिम्मत कर हुए खड़े और दृढ़ कदमों से हम आगे बढ़े अदब से नही, इज़्जत मिली गरूर करने के बाद सहारा मिला मुझे, लड़खड़ाहट दूर करने के बाद   तृप्त नहीं थे, होंठ फड़के जाते थे तृष्णा से कूप की ओर लड़खड़ाते थे देखा तो लंबी कतार थी प्यास बढ़ती जाती हर बार थी लेकिन प्यास बुझ चुकी थी जगत पर चढ़ने के बाद हाँ मेरी प्यास बुझ गई थी औरों का घड़ा भरने के बाद हरियाली आँखों में झूमा करती थी सृष्टि श्रावण का उल्लास भरती थी आँखें मूंद लीं हमने हरा काला हो गया सो के उठे तो सब कुछ खो गया स्वप्न बुना करते थे सच चूर-चूर करने के बाद हरी दूब ढूंढा करते थे सावन गुज़रने के बाद   किस्मत पर पड़े ताले को निहारा करते हैं रह रह कर ठंडी आह भरते हैं बहुत ढूंढा पर चाबी हाथ न आई फिर हमने पत्थरों पर नज़र गड़ाई आखिर यह ताला टूटा पत्थर से वार करने के बाद किस्मत की चाबी मिली, ताला बेकार करने के बाद हर उत्सव घर में मनाया जाता रहा पर कोई उत्साह नही मिला मुझे वहाँ उदास मुस्कान फिर भी बनी रही मुझ से कोई खुशी न गई सही फूल मन का खिल उठा पत्तों के झड़ने के बाद हर खुशी मिली मुझे पर्व गुज़रने के बाद अँधेरी गली में बैठ उजाला माँगती हूं क्योंकि रात है यह दिन नहीं मैं जानती हूं एक बाती का सहारा चाहती हूँ रोशनी को देखूँ दुबारा चाहती हूँ आए हो तुम कालिमा में रोशनी भरने के बाद तुम रोशनी ढूंढ लाए मगर रात गुज़रने के बाद गर्मियों की धूप में हर बूंद सूख गई बरखा भी आने से चूक गई दो बूंद के लिए हम तरस गए बादल नहीं पर आँखों से कुछ बरस गए बात फिर छेडी तुम्हीं ने बात गुज़रने के बाद दो घूंट पानी लाए हो बरसात ठहरने के बाद   हर घड़ी लौट आई हर पल गुज़रने के बाद जिंदगी खिलकर लौट आई मेरे मरने के बाद जिंदगी की लड़ाई शुरू हुई मेरे लड़ चुकने के बाद मेरी हर एक कृति छापी गई सबके पढ़ चुकने के बाद हाँ यह सच है कि कोई आया था मेरी कब्र पर मेरे मरने के बाद और फूल बरसाए थे किसी ने पतझड़ गुज़रने के बाद *****