पुराने साल की डायरी अभी रखी है नई साल की लेकर क्या करूँ, क्या लिखूँ?   तलवे अब भी सूजे हैं पुराने छाले बाक़ी हैं कैसे भला नई राह पर मैं चल पडूँ?   पुराना अभी बहुत कुछ बाकी है मेरे भीतर उसे कहाँ हटाऊँ, नए को कहाँ जगह दूँ?   पुराना अभी बहुत कुछ बक़ाया है मिलना फिर कैसे और नए-नए उधार करूँ?   ज़िंदा हूँ लेकिन अभी तो जीना बाक़ी है जब जिया ही नहीं अब तक, तो कैसे मरूँ?