अब मेरी कविताएं नहीं छपती
क्योंकि मैंने उन्हें छपाना छोड़ दिया है
मैंने छोड़ दिया है पाठकों को लुभाना
और संपादक के पास जाना छोड़ दिया है
अब मेरी कविताएं नहीं छपती
क्योंकि मैंने छोड़ दिया है धुरंधरों का अनुसरण
मैंने छोड़ दिया है ज़माने के साथ बहना
नहीं देखती चिह्न छोड़ गए जो दूसरों के चरण
अब मेरी कविताएं नहीं छपती
लिखती हूँ अब जो कलम लिखाती है
जो रगों में उबलता है या ठहरा है
वही कविता है मेरी जो बहे जाती है