
कहानी लिखने चला था, और खुद कहानी बन गया !
खोया रहा मंज़िलो में, और मुश्किल रास्ता होता गया !!
मालूम था पूरे जोर पर है हवाएं,
बेफिकर फिर भी चाल में चलता गया !
जानता था हो रही है गलतियां,
फिर से वही में गलतियां करता गया !!
कहानी लिखने चला था....
खोया रहा मंज़िलो में.....
ख़तम सी है ये ज़िन्दगी, ख़तम सी है ये खुशी !
आँखों में अब आंसू कहाँ, एक बूँद है सूखी हुई !!
में संजोता रहा सपने, और अरमां राख वो होता
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