मैं तो हूँ बादशाह दिलों का ,
पर तुझे पसन्द ग़ुलाम बहुत हैं ।
जो मर्जी है तो बन बेगम ,
वर्ना सफर-ए-मोहब्बत में मुक़ाम बहुत हैं।
जो रहना है तो बादशाह के दिल में रह ,
यूँ तो तेरे गुलामों के मकान बहुत है।
जज्बा-ए-वफ़ा -ए-इश्क़ है तो कर " हाँ " ,
कि खेल-ए-इश्क़ में होते लोग नाक़ाम बहुत हैं।
फैसला जरा जल्दी करना ,
नवाबों के इस शहर में मचते कोहराम बहुत हैं !
बहुत हसरत है घुड़चढ़ी की हमें,
कि नवाबी शादी में होते ताम-झाम बहुत हैं !
शॉपिंग हो , गुच्ची , एलवी , प्राडा ,
यूँ तो तेरे दिल में अरमान बहुत हैं !
करने को तेरे सपने पल-भर पूरे ,
बस बादशाह का एक ही फ़रमान बहुत है !
जो तेरी हाँ है तो ठीक , ना है तो भी ठीक
कि करने को इश्क़ इस ज़माने में " हूर " बहुत हैं ।
यूँ तो जचता है तेरे नाम के साथ मेरा नाम "पगली "
वर्ना जाने तूभी कि " ऐ -नीरज " खुद में ही मश्हूर बहुत है।