बोहोत लिखा, काफी कुछ लिखना रह गया

मकान नया मिला है मुझे, बदले में ये घर देह गया


कुछ दिन पहले मिला था सबसे, जाने का पल अब आया है

जिंदगी के इस दौर ने मुझको बोहोत कुछ सिखाया है


वक़्त को मैंने जीना सीखा, पहले सिर्फ गुज़रता था

अब मैं सब कुछ लिख देता हूँ, जो कहने से डरता था


बीत चूका है साल से ज्यादा, जोड़ी ना इक पाई है

पूछे जो कोई हिसाब साल का

मैंने जिंदगी कमाई है ।।