खुद को खोया है उसको पाने में,

अब कहाँ वो बात रही इस ज़माने में;



मैं लौट जाता हूँ आज भी उसके बुलाने पर,

लेकिन कम ही पड़ जाता है प्यार मेरा उसके पैमानें में...

-नीरज झा