"नारायण के रूप अनेक..."


नारायण के रूप अनेक...रामकिशन जिनमे से एक...



•एक ने राज-पाठ ठुकराया था;

एक ने गोवर्धन उठाया था...

एक ने बाली को दंड दिया;

एक ने कंस का वध किया...

एक चंचल मन वाला ग्वाला था;

एक पुरूषार्थ का ज्वाला था...

एक की थी जन्मपुर्व गाथा लिखी;

एक की थी कई लीलाएं दिखी...

एक की लीला रूकी नहीं;एक की गाथा झुकी नहीं...

दोनों की विपरीत काया थी;

दोनों में अलग किस्म की माया थी...

नारायण के रूप अनेक...रामकिशन जिनमे से एक...


•एक ने मुख में था बह्रांड दिखाया;

एक ने समस्त संसार झुकाया...

एक राम अयोध्या सा प्यारा था;

एक लीलाधर कृष्ण सा तारा था...

दोनों का था युग अलग,

लेकिन कर्म दोनों का एक था...

एक का नाम राम और एक का वसुदेव था...

बालकाल में कभी सबके को मोहते थे;

कभी देते थे कई दानव फेंक...

नारायण के रूप अनेक...रामकिशन जिनमे से एक...


•एक कहलाया रणजीत;तो एक का नाम रणछोर था...

एक का था दुत हनुमान;तो एक स्वंय माखनचोर था...

लीला देख एक की;सब प्रसन्न होया करते थे...

वनवास देख एक का;सब जन रोया करते थे...

दोनों महान धर्मी थे;दोनों पूज्य पराक्रमी थे...

एक ने धर्म का मान लिया;एक ने धर्म का ज्ञान दिया...

एक धर्म पक्ष से थे लडे;एक धर्म पक्ष पे थे खडे...

नारायण के रूप अनेक...रामकिशन जिनमे से एक...


•शेष नाग ने रूप लिया;दोनों युग मे साथ दिया...

कही छोटा लक्ष्मण सेवक था राम का;

कही वही बडा भाई बलराम था...

एक की सीता पतिव्रता नारी थी;

एक ब्रज राधा सी प्यारी थी...

एक मुरलीधर अनुरागी था;एक वनवासी बैरागी था...

दोनो का देखो प्रेम प्रसंग;

कही राधाकृष्ण कही सियाराम थे संग संग...

आओ सिखे प्रेम परिभाषा इनको देख...

नारायण के रूप अनेक...रामकिशन जिनमे से एक...


•रावण और दुर्योधन;

एक से ही दुष्कर्मी थे...एक से ही अधर्मी थे...

स्त्री मान पे हाथ दिया...उनकी थी ये भूल बड़ी...

कुल ने उनका साथ दिया...सबकी बुद्धि पे थी धूल पड़ी...

दोनों ने कुल का नाश किया;अधर्म नाम पे त्रास किया...

लजित किया समस्त संसार...भूला दिए सब संस्कार...

दोनों को था स्त्री शक्ति का ज्ञान नहीं...

ज्वाला रूपी स्त्रीयों का दोनो को पहचान नहीं...

अवतार ले विष्णु ने;समस्त संसार शुद्ध किया...

धर्म खातिर स्वंय रण में जाकर युद्ध किया...

आओ तुम भी लो ये लीला देख...

नारायण के रूप अनेक...रामकिशन जिनमे से एक...


•दोनों की थी कथा महान;

दोनों ही थे पात्र सम्मान...

कही थे रचयिता वाल्मीकि-तूलसीदास;

कही की रचना मे थे ऋषि व्यास...

दोनों पूज्य धर्म हितकारी थे;

एक धनुष तो दूजे चक्रधरी थे...

उनके आगे सब जन लेते माथा टेक...

नारायण के रूप अनेक...रामकिशन जिनमे से एक...


"हरि बोल श्याम बोल "

" बोलो राधे राधे"


~नीरज झा