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"मेरा असल"


"मेरा असल"

मेरा अस्ल भी उसे मिराज लगता हैं;निरर्थक मेरा हर काम काज लगता हैं...गर टूट कर बिखर भी जाऊँ मैं उसमें;तो भी फिका उसे मेरा हर साज लगता है..वो शख्स अक्सर;मुझे खुद से नाराज लगता है!

— NEERAJ JHA
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