"मेरा असल"मेरा अस्ल भी उसे मिराज लगता हैं;निरर्थक मेरा हर काम काज लगता हैं...गर टूट कर बिखर भी जाऊँ मैं उसमें;तो भी फिका उसे मेरा हर साज लगता है..वो शख्स अक्सर;मुझे खुद से नाराज लगता है!
"मेरा असल"
मेरा अस्ल भी उसे मिराज लगता हैं;निरर्थक मेरा हर काम काज लगता हैं...गर टूट कर बिखर भी जाऊँ मैं उसमें;तो भी फिका उसे मेरा हर साज लगता है..वो शख्स अक्सर;मुझे खुद से नाराज लगता है!