कविता शीर्षक -"मणिकर्णिका"


"ना झूकने उसने सम्मान दिया;

ना झूकने दी कभी शान...

एक अकेली वो लड़ती रही,

जब तक थी उसमें जान...

.

हिला दिया विदेशी साम्राज्य सारा;

ऐसी वो साम्राज्ञी थी...

कहने को वो थी अकली नारी,

पर वो झांसी वाली रानी थी...

.

ममता खातिर शमशीर उठाया;

हूई वो मातृभूमि पर कुर्बान...

जब जाके ज्वाला जली;

तब जाके बना हिन्दुस्तान...

.

ऐसी थी वो मणिकर्णिका;

ऐसी थी वो महान...

वो अकेली शूरवीर मर्दनी थी;

वो लक्ष्मीबाई रानी थी;

वो शोर्यवान हिंदुस्तानी थी...."


~नीरज झा

#jai_hind

#bharat_mata_ki_jai