एक किसान जब अपने
पानी से लबालब भरे खेत में
खेती करता है
तब उस पानी में होते है
कई कीड़े और साँप
लेकिन वो किसान को
कभी नहीं काटते!
किसान को काटने वाले होते है
वो सरकारी कीड़े और साँप
जो कभी नहीं बाँटते
मेहनताना श्रम और दाम
जो भोजन का ऋण दाता है
क्यों ऋण लेकर वो खाता है
क्यों जिदंगी उसकी खस्ता है...
क्या अन्न हमारा इतना सस्ता है?
क्यों लिखता नही उन पर कोई
कब तक रहेगी जनता सोई?
-Neeraj Jha


