"एक नज़्म"
सुनो;
सुना है परेशान हो,
क्या हुआ है बताओगे,
सुना है,
भरोसा नहीं रहा अब किसी पर तूम्हें,
ये भरोसा कहते किसे है?
मुझे ज़रा बताओगे...
हिज्र का गम लिये बैठे हो?
तभी हसीन आँखे नम लिए बैठे हो...
सुनो;बैठे थक जाओगे;
क्या तुम मुझे भरोसे का मतलब बताओगे?
क्या कहा तुमने? मैं चला जाऊ यहाँ से?
ठीक हैं;पर क्या तुम बिन बताए रह पाओगे?
नज़रे जो झुखा लेते हो;तुम बार बार
इन्हें कब तक यू छुपाओगे?
भरोसा ही ना टूटा है बस तुम्हारा?
क्या तुम मुझे भरोसे का मतलब बताओगे?
बदनाम दरबदर,बेखौफ गुमान जो लिए हो;
अब ये नज़रे किससे मिलाओगे?
सबसे तो झगड़े बैठे हो;
किसे अपनी बाते किसे बताओगे?
तुम ये जो इश्क,इश्क,इश्क...इश्क करते थे
ये इश्क कहते किसे हैं?
मुझे ज़रा बताओगे...
तुम बहोत खास हो,लेकिन अभी बहोत उदास हो
चलो मुझे ही कोस लो;
पर बात ना करके अब तुम मुझे भी सताओगे?
मेरे साथ चल लो;पर सवाल अब भी वही हैं
क्या तुम मेरे साथ भी ठेहर पाओगे?
सुनो;मेरी तरह लिखने मत लग जाना
वरना अनचाहे मे,ये पन्ने तुम भी भिगाओगे
बताओ ना;ये इश्क कहते किसे हैं?
क्या तुम मुझे भरोसे का मतलब बताओगे?
-NEERAJ JHA


