बलात्कार नहीं हुआ ...


सियासत के दवाब में दरोगा जी ने

बलात्कार को भी झुठला दिया...

दरोगा जी बोले 

कोई जीभ नहीं कटी

कोई नहीं टूटी रीढ़...

खुद की रीढ़ बेच कर 

दरोगा जी भी बिक गए 

सियासत की खेल में 

सारे बलात्कारी फिर कानून से खेल गए...


सुन कर कठोर निंदा 

यमराज से माँग कुछ वक्त मनीषा हूई फिर से जिंदा...

सवाल कई लिए वो आई थी

खुद कह अपनी हालत बताई थी



"मेरा एक सवाल है

छोटा है पर कमाल है

सब कुछ यहा बेहाल है

वाह रे इन्सानियत तेरी कैसी ये मिसाल है


कपड़े फाड़े जिस्म को चाटा

नौची रूह जुबान तक काटा

जिंदा खा गए मुझे वो हैवान 

दरोगा जी आप बताओ कैसै हूई मैं बेजान 


जात पूछो मेरी...पूछो मेरी उमर

कहा थे आप जब टूटी मेरी कमर

वर्दी का जोर होगा 

अभी चारों ओर शोर होगा


हैदराबाद देखो

दिल्ली देखो 

देखो उन्नाव 

देखो हथरस का हाल...

चीखे रोज आती है

रोज होती बहने बेटीयाँ बदहाल 


किसपर मैं विश्वास करूँ

किससे मैं आस करूँ?

कोन देगा मेरे सवालों का जवाब 

मेरे साथ जब हूआ ही नहीं कुछ 

तो कैसे हूई मैं बेजान? "


सवाल सुन उस बिटीयाँ के 

दरोगा जी भी रो गए 

घर जाकर अपनी दोनो बेटीयों को

गले लगाए सो गए


-Neeraj Jha