अमीक तिलिस्म है उसका देखना;
नगिने से क़ीमती आँखो की मुलाक़ात...
छाया रहता है कोई साज़ सा मुझपे;
बहोत अज़ीब सी है ये बात!
- नीरज झा


अमीक तिलिस्म है उसका देखना;
नगिने से क़ीमती आँखो की मुलाक़ात...
छाया रहता है कोई साज़ सा मुझपे;
बहोत अज़ीब सी है ये बात!
- नीरज झा