दिन महीने साल...
रोज बढ़ती है जिन्दगी...
उमरे-दराज मांग कर चलती है जिन्दगी।
लहमा लहमा कर दिन-रात..बदल जाते हैं,
सिलसिलेवार तारीखों से साल बदल जाते हैं।
लो फिर इस साल की बिदाई का वक्त आ गया
चन्द घड़ियों के महमान के जाने का वक्त आ गया
न कोई रुसवाई..न गिला, न शिकवा शिकायत है,
उस से क्या कहें...जाना ही जिसकी रवायत है।
कोशिशें लाख कर लो..रोक नहीं पाओगे...
चंद लम्हों में.. इक नया इतिहास रचाओगे..
हर बार..हर साल की
कुछ अलग कहानी है ,
कहीं खुशियों से भरे पल कहीं गमों की जिन्दगानी है.
अलविदा..अलविदा..
ऐ वर्ष!तेरे हर फसाने को
जुबां पे हर्फ हैं कुछ
नया सा कर दिखाने को ,
कोरे कागज पे रंग प्रेम के छिटक जाऐंगे...
चराग खुशियों के.
हर ओर जगमगायेंगे .
??नव वर्ष की शुभकामनाओं सहित ??
नीना सेठिया
