हर्ष और विस्मय के मिश्रित भाव थे

मेरे चेहरे पर...

सचमुच! उग आए थे मेरे पंख...


एक उन्मुक्त पंछी की तरह

व्योम विहार की मेरी लालसा

पूर्ण होती नज़र आई,

क्षितिज को छूने की उत्कंठा

हो गई तीव्र।


कुछ ही पलों में थी

मैं बादलों के बीच...

बाँहें फैलाकर

बारिश की हल्की फुहार के साथ

बादलों ने किया अभिनंदन।


सितारे हौसला आफ़जाई करते रहे

मुक़ाम तक पहुँचने की जिद ने

थकान को हारने पर किया मजबूर


सूरज ने दिया तोहफ़ा

एक मुट्ठी धूप...

उजास के अहसास को 

मुट्ठी में बाँधे मैं उड़ती रही

क्षितिज को पाने की कोशिश में...


अकस्मात एक दैत्याकार मानव

पीछा करते दिखा...

मैं उड़ने लगी पूरी ताकत के साथ

पर, आ गई उसकी पकड़ में...

उसने कभी न उड़ने की

दी हिदायत

नोच डाले मेरे पंख...

मैं गिड़गिड़ाती रही,

वो अट्टहास करता रहा...


अचानक मेरी नींद खुल गई

तेज चल रही थी मेरी साँसें...

भीगा था मेरा चेहरा

आँसुओं से...

#नीलू_चौधरी