अंजुरी भर पीत वर्ण
चुरा लाई सरसों के खेत से
इस विश्वास के साथ कि
अब मेरे वश में है वसंत
नहीं जाएगा कहीं
हो गया पतझड़ का अंत
थोड़ा- थोड़ा पीत वर्ण
छिड़क आयी हर जगह,हर वस्तु पर,
कोने में बैठी उदासी पर,
इस विश्वास के साथ कि
वसंत मुस्कुराएगा दिग्दिगंत
थोड़ा पीत वर्ण जब रह गया शेष
मैंने कर लिया उसका आचमन
इस विश्वास के साथ कि
मेरे भीतर जीवित रहेगा
वसंत का अवशेष।
#नीलू_चौधरी #वसंत


