वो गरीब,मजबूर औरत!
उसने नहीं देखा कभी
कोई वसंत।
उसके अतीत पर
उगे हैं बबूल...
पतझड़ हैं उसके
नियमित साथी।
फिर भी अपने अभावों के
मरुदेश में
नित्य उगाती है
उम्मीद के फूल।
रोज गटकती है इतनी व्यथा
कि मुख मलिन हैं उसके,
पर आँखों में झलकती है
एक आस...
कठिनाइयों के महासमन्दर में भी
वो बनाती है आस्था के पुल।
हर सुबह आँखें खोलती है
इस उम्मीद के साथ
कि सब अच्छा होगा!
#नीलू_चौधरी


