प्रीत की पाती तुम्हारे नाम करती हूँ।

स्वप्न में हर रात नज़रें चार करती हूँ।।


धड़कनों में तुम बसे हो, गान हो मेरे,

साथ रहते हो सदा अभिमान हो मेरे

मैं तुम्हारी मूर्ति दिल में ही बसाई हूँ,

इस शिवालय में सजे तुम शान हो मेरे।


याद मैं तुमको सुबह ओ शाम करती हूँ।

प्रीत की पाती तुम्हारे नाम करती हूँ।।


महफिलों में तुम सुखद परिहास देते हो।

पास हो हर वक्त ये आभास देते हो।।

मन विकल होता कभी,कंपित अधर होता।

गीत तुम रचकर पुनः मधुमास देते हो।।


क्यों तुम्हीं से प्यार बारम्बार करती हूँ ?

प्रीत की पाती तुम्हारे नाम करती हूँ।।


रेख चिंता की दिखे जब भाल पर मेरे,

देख दुनिया मुस्कुराती हाल पर मेरे।

जब नहीं उम्मीद आने की बची तेरी

अश्रु जल ढलके भला क्यों गाल पर मेरे।


तुम लिखे जो खत उसे नीलाम करती हूँ।

प्रीत की पाती तुम्हारे नाम करती हूँ।।


#नीलू_चौधरी