आज फिर क्यूँ हो खफा तुम ये बता दो गर हुई कोई खता तो फिर सजा दो   हाय तेरे दिल में है किसका ठिकाना कौन है वो नाम तो उसका बता दो   भूल जाऊँ किस तरह इस दर्द को मैं बेवफा तुम याद सब मेरी भुला दो   अब बहुत मैं सह चुकी हूँ बेवफाई फिर कभी आकर नहीं यूँ मुस्कुरा दो   याद क्यूँ तेरी मुझे आती नहीं है बुझ रहा है इश्क थोड़ी सी हवा दो