बुलाए मुझे मैं जगी रात भर न आया तू मैं क्यूँ थकी रात भर   मैं उनको तभी तो बुलाई यहाँ वो आए तो महफ़िल सजी रात भर   दुआ का असर कुछ तो होता नहीं दुखी तेरे दुख में हुई रात भर   मैं पाकर उसे खुश बहुत थी मगर गया फिर तो आँसू बही रात भर   है उम्दा लिखा ये गजल सब तेरी मैं गजलें ये तेरी सुनी रात भर