घर के सारे लोग
खाकर सो चुके हैं,
रात्रि की निःशब्दता ऐसी कि
साँसों की आवाज भी
वह सुन सकती है।
अकेली जाग रही है,
उस व्यक्ति के लिए
जिसे सात जन्मों तक
साथ निभाने का वचन
दे चुकी है।
चूल्हे की राख भी ठंडी ही चुकी है,
नींद से बोझिल है
उसकी पलकें...
हर आहट पर उसकी नजरें
उठ जाती है दलान की ओर...
अब भूख भी बर्दाश्त करना मुश्किल है,
पर,पति को खिलाए बगैर
मुँह में कौर नहीं डाल सकती...
पति को परमेश्वर जो
मानती है वह!!